नोट :- रेगुलर क्लास 24-02-2020 को शुरू हो रही हैं |
मोज़िला फायरफाक्स, सफारी, गूगल क्रोम, ओपेरा
पुराने ज्योतिष और लाल किताब में अंतर, लाल किताब के आगाज, कुदरत से किस्मत किस तरह आई, उसकी कुदरत का हुक्मनामा कहॉं पाया गया, उंचे फलक का अक्स किधर है|
इससे पहले कि हम विजुअल बेसिक-6 की प्रोग्रामिंग के बारे में जानने की प्रक्रिया शुरू करें, हमें प्रोग्रामिंग की कुछ बुनियादी अवधारणाओं को जरूर समझ लेना चाहिए|
गज़ल क्या होती है ? मेरे ख्याल से शायद किसी को ये बताने की जरूरत नहीं | जो लोग पढ़े लिखें है वो अपने स्कूल के समय से गज़ल शब्द से वाकिफ होते हैं व कालेज पहुँचने तक बहुत से स्कूल में पढ़ने वाले विधार्थी
पहला स्टेप : इस लिंक पर कलिक करें | एक नई विंडो खुलेगी आप इसे दाएं तरफ दिखाई दे रही तस्वीर में देख सकते हैं | जहाँ पर "URL to Like" लिखा है वहाँ पर अपने ब्लॉग का "URL" भरें |
आज मन में विचार आया कि कुछ ब्लॉग की पेज रैंकिंग चैक की जाएं कि कौन से ब्लॉग को पेज रैंकिंग में कौन सा नंबर मिल रहा है |
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Product Name : Lal Kitab 1940 Hard Copy + DVD (Free) Author : Vaneet Nagpal Payable Price : 1099/- (Inclusive all taxes) Couriers Charges : Free ! Hurry Up |
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लाल किताब का बेसिक कोर्स का 5वां बैच 16 मार्च 2019 को शुरू किया जा रहा है| लाल किताब को सीखने के लिए आप इस दिए गए नंबर पर Contact कर सकते हैं Mobile Np. 09646042574
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Product Name : Lal Kitab 1952 Hard Copy Author : Vaneet Nagpal Rate :25% Discount Payable Price : 1575/- (Inclusive all taxes) Couriers Charges : Free ! Hurry Up |
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समय के गर्भ में बहुत सी विधाएं छुपी हुई हैं और हैं और भारत के इतिहास में इनकी बहुतायत पाई जाती है। हमारे भारतीय ऋषि-मुनियों ने अपने अद्भुत ज्ञान के बल पर बहुत सी विधाओं पर बड़े विस्तार से इन सूत्रों को एक लयबद्ध माला के रूप में पिरो कर ग्रन्थों के रूप में सदा के लिए आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए स्थापित करके अपनी उस अथाह सोच को जन कल्याण के लिए परिभाषित भी किया है, जो जनकल्याण के लिए सदा तत्पर रहती है।
आज लाल किताब के अनुसार सूरज + बृहस्पत = चंद्र, (मसनुई ग्रह) के बारे में बताने का प्रयास करते हैं
इस कोर्स की फीस प्रति महिना 4000/- होगी कुल फ़ीस 8000/- होगी
फ़ीस एडवांस ली जाएगी| एक बार देय की फ़ीस लौटाई नहीं जाएगी
लाल किताब 1952 को सीखने के इच्छुक निम्न नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं
Whatsapp No. 09646042574
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पंडित रूप चंद जोशी जी द्वारा लिखित पांच अनुपम ग्रंथ लाल किताब के फरमान 1939, लाल किताब के अरमान 1940, लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941, लाल किताब तरमीमशुदा 1942, व सबसे अंत में लाल किताब 1952 उपलब्ध करवाए गया ये एक अंक अद्दभुत भेंट है | ये पांचो संस्करण आज अलग अलग पुस्तक के रूप में सभी को सुलभ हैं | लेकिन ! आज के डिजिटल युग में इनके डिजिटल संस्करण उपलब्ध नहीं है | श्री योगराज प्रभाकर जी ने सबसे पहले लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941 का डिजिटल रूप आम जनमानस का अपने ज़ाती प्रयासों से सन 2007 में उपलब्ध करवा दिया था | काफ़ी देर से मेरे मन में भी ये विचार आते रहे हैं कि काश सभी वर्ज़न डिजिटल रूप में उपलब्ध होते | मेंरे मन में दबी इच्छा ने फिर से इन संस्करणों के डिजिटल प्रारूप को जनमानस को उपलब्ध करवाने की इच्छा ने करवट ली | मैं श्री योगराज प्रभाकर जी से पहले ही प्रभावित था | इन सब से प्रभावित हो कर ही मैंने लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 को डिजिटल रूप देने का संकल्प लिया व इस काम को अकेले ही शुरू कर दिया | इस वर्जन को 18-01-2017 को सब के लिए उपलब्ध करवाने का जो वादा आप सब से किया गया था आज उसी संकल्प को पूरे होने पर आज 18-01-2017 को सब के लिए परम पूजनीय पंडित रूप चंद जोशी जी के जन्म दिन पर लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 का डिजिटल संस्करण एक DVD के रूप में सब के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है | इस कार्य को पूर्ण करने के लिए श्री बलदेव राज वर्मा जी, श्री मिल्ख राज बाघला जी ने उत्साह पूर्ण हौसला आफजाई की, मैं उनका दिल से शुक्रगुजार हूँ | लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 का डिजिटल वर्ज़न lalkitab1952.com पर आनलाइन उपलब्ध है इस डिजिटल वर्ज़न की कुछ झलकियाँ पेश हैं
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पंडित रूप चंद जोशी जी द्वारा लिखित पांच अनुपम ग्रंथ लाल किताब के फरमान 1939, लाल किताब के अरमान 1940, लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941, लाल किताब तरमीमशुदा 1942, व सबसे अंत में लाल किताब 1952 उपलब्ध करवाए गया ये एक अंक अद्दभुत भेंट है | ये पांचो संस्करण आज अलग अलग पुस्तक के रूप में सभी को सुलभ हैं | लेकिन ! आज के डिजिटल युग में इनके डिजिटल संस्करण उपलब्ध नहीं है | श्री योगराज प्रभाकर जी ने सबसे पहले लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941 का डिजिटल रूप आम जनमानस का अपने ज़ाती प्रयासों से सन 2007 में उपलब्ध करवा दिया था | काफ़ी देर से मेरे मन में भी ये विचार आते रहे हैं कि काश सभी वर्ज़न डिजिटल रूप में उपलब्ध होते | मेंरे मन में दबी इच्छा ने फिर से इन संस्करणों के डिजिटल प्रारूप को जनमानस को उपलब्ध करवाने की इच्छा ने करवट ली | मैं श्री योगराज प्रभाकर जी से पहले ही प्रभावित था | इन सब से प्रभावित हो कर ही मैंने इल्म सामुद्रीक़ की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 को डिजिटल रूप देने का संकल्प लिया व इस काम को अकेले ही शुरू कर दिया | इस वर्जन को 18-01-2017 को सब के लिए उपलब्ध करवाने का जो वादा आप सब से किया गया था आज उसी संकल्प को पूरे होने पर आज 18-01-2017 को सब के लिए परम पूजनीय पंडित रूप चंद जोशी जी के जन्म दिन पर इल्म सामुद्रीक़ की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 का डिजिटल संस्करण एक DVD के रूप में सब के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है | इस कार्य को पूर्ण करने के लिए श्री बलदेव राज वर्मा जी, श्री मिल्ख राज बाघला जी ने उत्साह पूर्ण हौसला आफजाई की, मैं उनका दिल से शुक्रगुजार हूँ | इल्म सामुद्रिक की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 का डिजिटल वर्ज़न lalkitab1952.com पर आनलाइन उपलब्ध है इस डिजिटल वर्ज़न की कुछ झलकियाँ पेश हैं
इल्म सामुद्रीक़ की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 को shopclues.com से पाने के लिए क्लिक करें
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अधिक जानकारी के लिए आप मोबाइल नंबर 8198897655 पर काल कर सकते हैं
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Vaneet Nagpal
मोबाइल नंबर-8198897655
Jalalabad
पाप (राहू-केतु) बैठक खुद साथी हो
मारक घर से गुरु भी डरता
आठ दृष्टि खाली जो
ग्रह मुश्तरका (मिले-जुले) बुरा नहीं करते
बंद मुठ्ठी (3) के खानों में
फल 2-11 अपनों अपने
धर्म(२) मंदिर गुरुद्वारा ( नंबर 11) में
ज्ञान समुंदर घर 9 वें का
या फल उम्र हो पहली का
सफेद झंडा कोहसार पे झूले
उम्र बुढ़ापा घर 2 का
पाप की बैठक घर 2 गुरु के
गृहस्ती शुक्र भी बनता जो
लेख जगत का मस्तक गिनते
मौत जन्म जहाँ मिलता तो
2. इस घर के ग्रह आखिरी उम्र बुढ़ापे में हमेशा नेक फल देंगे, खवाह (चाहे) किसी दूसरे उसूलों की गिनती या चाल वगैरह से कितने ही मंदे क्यों न हो।
(1. मंगल बद (सूर्य, शनि)
2. पापी ग्रह (राहु, केतु, शनि)
3. खाना नं० 1, 7, 4, 10
ग्रह किस्मत बन जाता हो
खाली पड़ा घर 10 जब टेवे
सोया हुआ कहलाता होआ
बुनियाद समंदर ग्रह(१) 9 होते
पहाड़ ऊंचा घर 2 का हो
चाल असर ग्रह दूजे बैठे
ज़ेर (नीचे) असर गुरु साया(२) हो
हवा बारिश जो 9 से चलती
टक्कर दूजे(३) का खाती हो
आठ पड़ा घर जब तक खाली(४)
असर भला ही देती होआ
शुरू उम्र में असर दूजे का
घर 6वें पर पड़ता हो
जाती असर हो नेक जो अपना
वक्त बुढ़ापे बढ़ता हो
बुनियाद मंदिर(२) घर(१) चौथा गिनते
आठ छटे(३) से मिलता है
खाली(३) होते गुरु मंदिर(२) टेवे
असर रूहानी उम्दा हो
1. खाना नं० 2 हमेशा 9 ही ग्रहों या खाना नं० 9, जो समुद्र गिना जायेगा, की बुनियाद होगा मगर खुद नं० 2 की मियाद खाना नं० 4 होगा।
2. जैसा भी बृहस्पत टेवे में हो वैसी ही हवा के झोकों से साथ होगी।
3. खाना नं० 8 देखता है खाना नं० 2 को, खाना नं० 2 देखता है नं० 6 को, इसी तरह खाना नं० 2 में खाना नं० 8 का और खाना नं० 6 का बाह्मी ताल्लुक (आपसी संबंध) हो जाता है।
खाना नं० 8 खाली हो तो खाना नं० 2 उम्दा होगा, मगर जब खाना नं० 2 खाली हो तो सब कुछ उम्दा होगा।
बृहस्पत नं० 2 और खाना नं० 8 खाली के वक्त पर बृहस्पत मंदा ही होगा या बृहस्पत की हवा मंदी आंधी होगी जो हर तरह का नुक्सान करेगी। मगर नं० 9 बरसाती मौनसून हवा के उठने का समुद्र हो तो खाना नं० 2 बारिश से लदी हवा से टकरा कर बरसाने वाला कोहसार (पहाड़ों का लम्बा सिलसिला) होगा।