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मोज़िला फायरफाक्स, सफारी, गूगल क्रोम, ओपेरा

लाल किताब : विषय सूची

पुराने ज्योतिष और लाल किताब में अंतर, लाल किताब के आगाज, कुदरत से किस्मत किस तरह आई, उसकी कुदरत का हुक्मनामा कहॉं पाया गया, उंचे फलक का अक्स किधर है|

अब विजुअल बेसिक-६ सीखें हिंदी में|

इससे पहले कि हम विजुअल बेसिक-6 की प्रोग्रामिंग के बारे में जानने की प्रक्रिया शुरू करें, हमें प्रोग्रामिंग की कुछ बुनियादी अवधारणाओं को जरूर समझ लेना चाहिए|

क्या किसी भी गज़ल का बहर में होना जरूरी है ? भाग नंबर-१

गज़ल क्या होती है ? मेरे ख्याल से शायद किसी को ये बताने की जरूरत नहीं | जो लोग पढ़े लिखें है वो अपने स्कूल के समय से गज़ल शब्द से वाकिफ होते हैं व कालेज पहुँचने तक बहुत से स्कूल में पढ़ने वाले विधार्थी

How to Setup FACEBOOK Like Batan on your BLOG

पहला स्टेप : इस लिंक पर कलिक करें | एक नई विंडो खुलेगी आप इसे दाएं तरफ दिखाई दे रही तस्वीर में देख सकते हैं | जहाँ पर "URL to Like" लिखा है वहाँ पर अपने ब्लॉग का "URL" भरें |

गूगल पेज रैंकिंग में कौन कहाँ पर .............

आज मन में विचार आया कि कुछ ब्लॉग की पेज रैंकिंग चैक की जाएं कि कौन से ब्लॉग को पेज रैंकिंग में कौन सा नंबर मिल रहा है |

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लाल किताब

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मंगलवार, फ़रवरी 11, 2020

free live demo based on lal kitab

लाल किताब से प्रेम व विश्वास रखने वालों के लिए लाल किताब की एक फ्री डेमो क्लास मंगलवार 16-02-2020 को रखी जा रही है| क्लास का वक़्त 3.00 से 5.00 बजे तक होगा| लाल किताब सीखने की इच्छुक इस फ्री लाइव डेमो क्लास को ज्वाइन कर सकते हैं| ये क्लास Whatsapp पर लाइव चलेगी| इस क्लास में ख़ास हाईलाईट "प्राचीन ज्योतिष से बनने वाली कुंडली को लाल किताब की कुंडली कैसे बनाएंगे, ये बताया जायेगा" इच्छुक शख्स अपना नंबर 09877116557 पर सेंड कर सकते हैं|
नोट :- रेगुलर क्लास 24-02-2020 को शुरू हो रही हैं |

शुक्रवार, मार्च 29, 2019

Lal Kitab 1940

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Product Name : Lal Kitab 1940 Hard Copy + DVD (Free)

Author : Vaneet Nagpal Payable Price : 1099/- (Inclusive all taxes) Couriers Charges : Free ! Hurry Up
अब आप PayTM के द्वारा पेमेंट कर सकते हैं, आप यहाँ पर दिए गए कोड को स्केन करें व यहाँ पर दी गई रकम का चयन करें, व सेंड कर दें, पेमेंट का स्क्रीन शाट आप मोबाइल नंबर 09877116557 पर भेजें व इसके साथ ही अपना पूरा पता व मोबाइल नंबर भी सेंड करें|

शुक्रवार, मार्च 08, 2019

लाल किताब का बेसिक कोर्स का 5वां बैच 16 मार्च 2019 को शुरू किया जा रहा है| लाल किताब को सीखने के लिए आप इस दिए गए नंबर पर Contact कर सकते हैं Mobile Np. 09646042574


इस कोर्स में पढाए जाने वाले विषय हैं :-

1. ग्रहों की मुखतलिफ़ हालतें
2. ग्रहों की आम साल
3. ग्रहों की एक साल में असर करने का वक़्त
4. ख़ाना नंबर की उम्र
5. ग्रह की उम्र का असर
6. रियायती चालीस दिन
7. टकराव व बर्ताव का पैमाना
8. 35 साला चक्कर
9. जन्म दिन का ग्रह
10. जन्म वक़्त का ग्रह
11. धर्मी ग्रह
12. अंधे ग्रह
13. साथी ग्रह
14. शनि का चौरस्ता पर उपाय किया जाए धर्मस्थान का काम देगा पर कैसे बना
15. ग्रह और राशि का आपस में ताल्लुक़
16. ग्रह व राशियों की आपसी गलतफ़हमी
17.ख़ाना नंबर 1
18. ख़ाना नंबर 2
19. ख़ाना नंबर 3
20. ख़ाना नंबर 4
21 ख़ाना नंबर 5
22. ख़ाना नंबर 6
23. ख़ाना नंबर 7
24. ख़ाना नंबर 8
25. ख़ाना नंबर 9
26. ख़ाना नंबर 10
27. ख़ाना नंबर 11
28. ख़ाना नंबर 12
29. पहले घर कौन से व बाद के घर कौन से
30. सोया हुआ घर
31. सोया हुआ ग्रह
32. ग्रहों की दृष्टियाँ
33. उलटे घर
34. 100 फ़ीसदी व अपने से सातवें को देखने का फ़र्क
35. योग दृष्टि सेहत बीमारी के समय का टेबल
36. ग्रहों का टकराव
37. ग्रहों का धोखा
38. ग्रहों की अचानक चौट
39. ऋण पितृ का ग्रह
40. ऋण पितृ की पहली हालत और उपाय
41. ऋण पितृ की दूसरी हालत और उपाय
42. महादशा का ग्रह
43. चंद्र कुंडली
44. धोखे का घर कैसे निकालें
45. मददगार उपाय
46. जन्म दिन और जन्म वक़्त के हिसाब उपाय
47. ग्रह का उपाय
48. मसनुई ग्रहों के भेद
49. ख़ाना नंबर 1-7-8-11 का मुश्तरका असर
50. ख़ाना नंबर 2-8-12-6 का मुश्तरका असर
51. ख़ाना नंबर 3-11-5-9-10 का मुस्तरका असर
52. ख़ाना नंबर 4-10-2 का मुश्तरका असर
53. ग्रह कुंडली की मकान के हिसाब से जाँच
54.मकान की हालत मालूम होने पर टेवा बनाने का ढंग
55.वर्षफल बनाने का ढंग

शुक्रवार, मार्च 01, 2019

लाल किताब 1952 अब बुक के रूप में

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Product Name : Lal Kitab 1952 Hard Copy

Author : Vaneet Nagpal Rate : 2100/-
25% Discount
Payable Price : 1575/- (Inclusive all taxes) Couriers Charges : Free ! Hurry Up
अब आप PayTM के द्वारा पेमेंट कर सकते हैं, आप यहाँ पर दिए गए कोड को स्केन करें व यहाँ पर दी गई रकम का चयन करें, व सेंड कर दें, पेमेंट का स्क्रीन शाट आप मोबाइल नंबर 09877116557 पर भेजें व इसके साथ ही अपना पूरा पता व मोबाइल नंबर भी सेंड करें|

रविवार, जनवरी 13, 2019

Crow-grass

आज फिर से लाल किताब के अनुसार बात करते हैं। लाल किताब में एक बहुत ही कारामद उपाय बताया गया है "गऊ-ग्रास" इस उपाय को कैसे किया जाता है, आप को ये बताने का प्रयास किया जा रहा है। आप अपने भोजन ग्रहण के वक़्त अपने भोजन में से हर पदार्थ के तीन भाग (हिस्से) अलग से निकाल कर रख दें। इन तीन हिस्सों को ही गऊ-ग्रास कहते हैं। इन तीन हिस्सों में से एक हिस्सा गाय को, एक हिस्सा कुत्ते को, व एक हिस्सा कौए को (Crow) को खिलाना ही गऊ-ग्रास है। अब साथ ही ये उपाय किया क्यों जाता है इसे भी समझ लें। गाय को शुक्कर से संबंधित माना गया है लाल किताब में। इंसान का भोजन या अनाज का एक हिस्सा गाय को देने का मतलब है, शुक्कर की मदद प्राप्त करना या शुक्कर को नेक करना। औलाद के लिए केतु का उपाय करने के लिए कहा गया है। तो अपने भोजन का एक हिस्सा कुत्ते को देने से केतु की मदद पाने के लिए किया जाता है धन दौलत की हानि के लिए कौए को अपनी खुराक का हिस्सा देना मतलब शनि की सहायता प्राप्त करना है। तो इस प्रकार ये उपाय करने से तीन ग्रहों का फल प्राप्त किये जाने का उपाय बताया गया है लाल किताब। देखने में ये उपाय साधारण सा लगता है, लेकिन इस उपाय को करके देखें। रिज़ल्ट आपको हैरान कर देंगे
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शनिवार, दिसंबर 22, 2018

इस नन्हें बच्चे की मुठ्ठी में पकड़ा देव आकाश का है

आज का विषय लाल किताब से संबंधित है। लाल किताब की भाषा अलंकारिक भाषा है और इस में लिखी गई पंक्तियां लाल किताब पढ़ने वाले को आसानी से समझ में नहीं आती।


आज हम लाल किताब में लिखी इसी प्रकार की पंक्तियों को आम साधारण भाषा में समझने का प्रयास करेंगे लाल किताब 1952 के पेज नंबर 12 पर लिखा गया है।

इस बच्चे की नन्हीं मुट्ठी में पकड़ा देव आकाश का है,
भरा खजाना जिसके अंदर निधि सिद्धि की माला है।


अब इस पहली पंक्ति की ओर ध्यान देते हैं इस पहली पंक्ति में लिखा गया है :-

"इस बच्चे की नन्ही मुट्ठी में पकड़ा देव आकाश का है"

तो इस पहली पंक्ति में लाल किताब के रचियता पंडित रूप चंद जोशी जी ने आम भाषा में यह लिख दिया कि जब एक छोटा सा बच्चा जो जन्म लेता है उसने अपने हाथ में आकाश देव को पकड़ा हुआ है।

लाल किताब को पढ़ने वाला एक आम व्यकि तो क्या लगभग आम सोच रखने वाला व्यक्ति भी यही समझेगा कि क्या ऐसा संभव हो सकता है, तो हर किसी का जवाब नहीं होगा, और उसका जवाब होगा कि एक नन्हा सा बच्चा आकाश को कैसे पकड़ सकता है ?

वैसे भी ये ज़ाहिर सी बात है एक नन्हा बच्चा आकाश को नहीं पकड़ सकता वह अपनी बंद मुठ्ठियाँ तो खोल नहीं सकता किसी चीज को पकड़ेगा कैसे ?

तो अब जब लाल किताब में ऐसा लिखा गया है तो इसका मतलब भी होगा, ज़ाहिर सी बात है कि ये कोई काल्पनिक किरदार तो है नहीं, सामुद्रिक विधा पर लिखी गई लाल किताब एक अनमोल कृति है।

तो इस पहली पंक्ति में होगा आकाश मंडल में स्थित ग्रहों की स्थिति की मौजूदगी का वर्णन किया है, न कि आकाश (बुध) को मुठ्ठी में पकड़ने की बात की गई है।

हो सकता है कई एक को ये बात हास्यपद लगे लेकिन जब इस लिखी गई पंक्ति का मतलब समझ लेंगे तब दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जायेंगे।

वैसे तो लाल किताब आम भाषा में लिखी गई है, लेकिन इसमें लिखी गई हर एक पंक्ति, हर एक अल्फ़ाज़, हर एक शब्द, की अपनी अहमीयत है, ये शब्द सामुद्रिक विधा (जयोतिष) से संबन्ध रखता है।

इसलिए इस पंक्ति का उत्तर देखने के लिए या उत्तर समझने के लिए हमें अपना दृष्टिकोण भी बदलना होगा यानि इसे ज़योतिष्य नज़रिये से देखना व समझना होगा।

और इस तरीके से समझना हो तो इस लाइन में यह लिखा है कि एक बच्चा जब जन्म लेता है तो आकाश मंडल में ग्रहों की जो स्थिति होती है, वह आकाशमंडल में स्थित ग्रहों की स्थिति का खाका या नक्शा वह जन्म लेने वाला बच्चा अपने हाथ पर एक ख़ाके के रूप में लेकर आता है|

बुध को लाल किताब में आकाश माना गया है आकाश के ऊपर ही सभी ग्रह आसमान में जिसे हम आकाशगंगा कहते हैं घूम रहे होते हैं।

तो यहां पर लाल किताब के रचिता पंडित रूप चंद जोशी जी ने यह बताने का प्रयास किया है कि इस बुध यानि आकाश के दायरे में सभी ग्रह घूम रहे हैं और बच्चे के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति जिस प्रकार होती है वह इस बुध के दायरे में मौजूद मानी जाएगी, और इन ग्रहों की स्थिति का चित्र हाथ पर रेखाओं के रूप में मौजूद होगा|

तो आप देखिए पंडित जी ने कैसे आम भाषा में इसको समझाने का प्रयास किया है यानि की आकाश मंडल में ग्रहों की स्थिति को समझाने का प्रयास किया है|

इस प्रकार आप लाल किताब को पढ़ते समय यदि इस तरह का नजरिया अपनाएंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद आपके सामने खुलती चली जाए आज की पोस्ट का मंतव्य भी यही था कि लाल किताब को समझा कैसे जाए ?

समय के गर्भ में बहुत सी विधाएं छुपी हुई हैं और हैं और भारत के इतिहास में इनकी बहुतायत पाई जाती है। हमारे भारतीय ऋषि-मुनियों ने अपने अद्भुत ज्ञान के बल पर बहुत सी विधाओं पर बड़े विस्तार से इन सूत्रों को एक लयबद्ध माला के रूप में पिरो कर ग्रन्थों के रूप में सदा के लिए आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए स्थापित करके अपनी उस अथाह सोच को जन कल्याण के लिए परिभाषित भी किया है, जो जनकल्याण के लिए सदा तत्पर रहती है।

इन्ही विधाओं में से एक विधा है शरीर लक्षण

यानि आप के आपके शरीर पर मौजूद निशान, आपके हाव-भाव, भाव-भंगिमा, चाल-ढाल, चेहरे पर बालों को रखने या दिखाने का ढंग, तिल, मस्सा, ललाट पर लकीरें इत्यादि के विषय में बड़ी संजीदगी से लिखा गया है। आज इन्ही में से एक तिल चिन्ह पर आज की पोस्ट में बताने का प्रयास किया जा रहा है।

किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर पाए जाने वाले तिल पर विचार करके उसके बारे में बताया जा सकता है। चेहरे पर अलग-अलग स्थानों पर 100 के करीब तिलों के बारे में हमारे प्राचीन ग्रन्थों में बताया गया है।

सबसे पहले हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि तिल के कितने रूप होते हैं तिल दो प्रकार के कहे गए हैं।

एक शहद के समान लाल रंग वाले तिल
दूसरा वह काले काले रंग वाले तिल

आमतौर पर इंसान के चेहरे पर बाजू पर पीठ पर टांगों पर पेट पर शरीर के अन्य कई हिस्सों में पाए जाते हैं।

शहद के समान लाल रंग वाले तिल पर व्यक्ति को शुभ अवसर देने वाले माने गए हैं व काले रंग काले रंग के तिल किसी भी व्यक्ति को अशुभ असर देने वाले माने गए हैं। यह तिल चिन्ह किसी भी व्यक्ति के शरीर पर विभिन्न ग्रहों के प्रभाव के कारण ही प्रकट होते हैं। रंग के अतिरिक्त भी तिल के दो प्रकार मुख्य तौर पर हमारे भारतीय ऋषियों-मुनियों द्वारा बताए गए हैं ।

एक उत्तर वाले तिल और दूसरे बिना उत्तर वाले तिल उत्तर वाले तिल

अब इन दोनों प्रकार के तिलों को समझने का प्रयास करते हैं उत्तर प्रकार वाले तेल मुख के यानी कि इंसान के चेहरे पर जिस स्थान पर होते हैं ठीक वैसा ही तिल व्यक्ति के शरीर के किसी अन्य अंग विशेष पर भी होता है या मौजूद पाया जाता है। बिना उत्तर वाले तिल शरीर के किसी भी भाग में हो सकते हैं और उनका कोई उत्तर वाला तिल शरीर के किसी अन्य भाग पर नहीं होता

तिलों के फल के संबंध में प्राचीन विद्वानों ने अलग अलग हो चुकी चुकी हो चुकी चुकी हैं यहां पर उन दोनों मतों को बताने का समझाने का प्रयास किया जा रहा है|

भारतीय मत के अनुसार मनुष्य के ललाट पर यानि चेहरे पर शनि की गुरु की मंगल की सूर्य की शुक्र की बुध तथा चंद्र की रेखाएं कही गई हैं इनमें से प्रत्येक रेखा पर पांच-पांच तिल माने गए हैं जिन का शुभ फल उनकी स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकता है या होता है जिन लोगों के चेहरे पर यानि ललाट में 7 रेखाएं रेखाएं स्पष्ट ना हो तो उनके ललाट पर स्थित तिलों पर विचार करते समय आप चित्र के अनुसार इन 7 रेखाओं की कल्पना करके इस चित्र में बताएं अनुसार ही किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर मौजूद तिल वाले स्थान को निश्चित करके उसके प्रभाव के संबंध में जानकारी प्राप्त करके ही फलादेश कर सकते हैं|

ललाट की रेखाओं के अतिरिक्त व्यक्ति के चेहरे पर दाएं और बाएं कपोल पर नेत्र पर नासिका पर कान पर मुख आदि स्थानों पर दिखाई कुछ दिल दिखाई देते हैं तो इस प्रकार चेहरे पर दिखाई देने वाले कुल तिलों की संख्या लगभग तकरीबन 100 मानी मानी गई है यहां पर आपको यह बता देना जरूरी समझा जा रहा है कि यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे पर इस चित्र में दिखाए गये तिलों के अनुसार सभी तिल ही मौजूद हों, बहुत से व्यक्ति के चेहरे पर एक भी तिल नहीं पाया जाता और कुछ लोगों के चेहरे पर दो या तीन या चार या पांच की संख्या में तिल पाए जाते हैं|

चेहरे के तिलों का भाव यह नहीं है कि व्यक्ति के चेहरे पर हर जगह तिल पाया जाएगा इन 100 तिलों को चेहरे पर कहाँ कहाँ पर पाया जा सकता है वैसे ही चित्र में आपको दिखाने का प्रयास किया जा रहा है चेहरे पर पाए जाने वाले 100 तिलों के निशान आपको इस चित्र में दिखाए गए हैं

अगली पोस्ट में आपको चेहरे पर पाए जाने वाले तिलों के अलग अलग प्रभाव के बारे में बताने का प्रयास किया जायेगा

शनिवार, दिसंबर 15, 2018

saturn ki drishti

आज लाल किताब के अनुसर शनि की दृष्टियों के बारे में बात करते हैं




Sun+Jupitor

आज लाल किताब के अनुसार सूरज + बृहस्पत = चंद्र, (मसनुई ग्रह) के बारे में बताने का प्रयास करते हैं

मंगलवार, दिसंबर 04, 2018

Astroguru is comming soon...........

रविवार, मई 27, 2018

लाल किताब 1952 पर आधारित बेसिक कोर्स

लाल किताब 1952 पर आधारित बेसिक कोर्स लाल किताब 1952 पर आधारित बेसिक कोर्स के जून 2018 से शुरू किया जा रहा है| ये कोर्स दो महीने लगातार चलेगा| हर रोज एक घंटे की एक क्लास होगी जो Whatsaap पर लाइव चलेगी| एक महीने में 24 क्लास होंगी| दो महीने में 48 क्लास होंगी|

इस कोर्स की फीस प्रति महिना 4000/- होगी कुल फ़ीस 8000/- होगी

फ़ीस एडवांस ली जाएगी| एक बार देय की फ़ीस लौटाई नहीं जाएगी

लाल किताब 1952 को सीखने के इच्छुक निम्न नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं

Whatsapp No. 09646042574
09877116557

सीट लिमिटिड हैं इसलिए जल्द ही अपनी सीट सुरक्षित करें

गुरुवार, जनवरी 26, 2017

Lal Kitab Series Combo DVD 1952-1942-1940

Lal Kitab Series Combo DVD 1952-1942-1940
बड़े रूप में देखने के लिए इस चित्र पर क्लिक करें
पंडित रूप चंद जोशी जी द्वारा लिखित पांच अनुपम ग्रंथ लाल किताब के फरमान 1939, लाल किताब के अरमान 1940, लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941, लाल किताब तरमीमशुदा 1942, व सबसे अंत में लाल किताब 1952 उपलब्ध करवाए गया ये एक अंक अद्दभुत भेंट है | ये पांचो संस्करण आज अलग अलग पुस्तक के रूप में सभी को सुलभ हैं | लेकिन ! आज के डिजिटल युग में इनके डिजिटल संस्करण उपलब्ध नहीं है | श्री योगराज प्रभाकर जी ने सबसे पहले लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941 का डिजिटल रूप आम जनमानस का अपने ज़ाती प्रयासों से सन 2007 में उपलब्ध करवा दिया था | काफ़ी देर से मेरे मन में भी ये विचार आते रहे हैं कि काश सभी वर्ज़न डिजिटल रूप में उपलब्ध होते | मेंरे मन में दबी इच्छा ने फिर से इन संस्करणों के डिजिटल प्रारूप को जनमानस को उपलब्ध करवाने की इच्छा ने करवट ली | मैं श्री योगराज प्रभाकर जी से पहले ही प्रभावित था | इन सब से प्रभावित हो कर ही मैंने लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 को डिजिटल रूप देने का संकल्प लिया व इस काम को अकेले ही शुरू कर दिया | इस वर्जन को 18-01-2017 को सब के लिए उपलब्ध करवाने का जो वादा आप सब से किया गया था आज उसी संकल्प को पूरे होने पर आज 18-01-2017 को सब के लिए परम पूजनीय पंडित रूप चंद जोशी जी के जन्म दिन पर लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 का डिजिटल संस्करण एक DVD के रूप में सब के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है | इस कार्य को पूर्ण करने के लिए श्री बलदेव राज वर्मा जी, श्री मिल्ख राज बाघला जी ने उत्साह पूर्ण हौसला आफजाई की, मैं उनका दिल से शुक्रगुजार हूँ | लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 का डिजिटल वर्ज़न lalkitab1952.com पर आनलाइन उपलब्ध है इस डिजिटल वर्ज़न की कुछ झलकियाँ पेश हैं
लाल किताब सीरीज़ के तीन वर्जन 1952-1942 व 1940 का Combo वर्जन को shopclues.com से पाने के लिए क्लिक करें






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Lal Kitab 1942

Ilm Samudrik Ki Lal Kitab Tarmimshuda 1942 DVD awailable Now पंडित रूप चंद जोशी जी द्वारा लिखित पांच अनुपम ग्रंथ लाल किताब के फरमान 1939, लाल किताब के अरमान 1940, लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941, लाल किताब तरमीमशुदा 1942, व सबसे अंत में लाल किताब 1952 उपलब्ध करवाए गया ये एक अंक अद्दभुत भेंट है | ये पांचो संस्करण आज अलग अलग पुस्तक के रूप में सभी को सुलभ हैं | लेकिन ! आज के डिजिटल युग में इनके डिजिटल संस्करण उपलब्ध नहीं है | श्री योगराज प्रभाकर जी ने सबसे पहले लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941 का डिजिटल रूप आम जनमानस का अपने ज़ाती प्रयासों से सन 2007 में उपलब्ध करवा दिया था | काफ़ी देर से मेरे मन में भी ये विचार आते रहे हैं कि काश सभी वर्ज़न डिजिटल रूप में उपलब्ध होते | मेंरे मन में दबी इच्छा ने फिर से इन संस्करणों के डिजिटल प्रारूप को जनमानस को उपलब्ध करवाने की इच्छा ने करवट ली | मैं श्री योगराज प्रभाकर जी से पहले ही प्रभावित था | इन सब से प्रभावित हो कर ही मैंने इल्म सामुद्रीक़ की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 को डिजिटल रूप देने का संकल्प लिया व इस काम को अकेले ही शुरू कर दिया | इस वर्जन को 18-01-2017 को सब के लिए उपलब्ध करवाने का जो वादा आप सब से किया गया था आज उसी संकल्प को पूरे होने पर आज 18-01-2017 को सब के लिए परम पूजनीय पंडित रूप चंद जोशी जी के जन्म दिन पर इल्म सामुद्रीक़ की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 का डिजिटल संस्करण एक DVD के रूप में सब के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है | इस कार्य को पूर्ण करने के लिए श्री बलदेव राज वर्मा जी, श्री मिल्ख राज बाघला जी ने उत्साह पूर्ण हौसला आफजाई की, मैं उनका दिल से शुक्रगुजार हूँ | इल्म सामुद्रिक की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 का डिजिटल वर्ज़न lalkitab1952.com पर आनलाइन उपलब्ध है इस डिजिटल वर्ज़न की कुछ झलकियाँ पेश हैं
इल्म सामुद्रीक़ की लाल किताब तरमीमशुदा 1942 को shopclues.com से पाने के लिए क्लिक करें







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मंगलवार, जनवरी 19, 2016

Lal kitab 1952 dvd

Lal Kitab 1952 DVD awailable Now पंडित रूप चंद जोशी जी द्वारा लिखित पांच अनुपम ग्रंथ लाल किताब के फरमान 1939, लाल किताब के अरमान 1940, लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941, लाल किताब तरमीमशुदा 1942, व सबसे अंत में लाल किताब 1952 उपलब्ध करवाए गया ये एक अंक अद्दभुत भेंट है | ये पांचो संस्करण आज अलग अलग पुस्तक के रूप में सभी को सुलभ हैं | लेकिन ! आज के डिजिटल युग में इनके डिजिटल संस्करण उपलब्ध नहीं है | श्री योगराज प्रभाकर जी ने सबसे पहले लाल किताब (तीसरा हिस्सा) 1941 का डिजिटल रूप आम जनमानस का अपने ज़ाती प्रयासों से सन 2007 में उपलब्ध करवा दिया था | काफ़ी देर से मेरे मन में भी ये विचार आते रहे हैं कि काश सभी वर्ज़न डिजिटल रूप में उपलब्ध होते | मेंरे मन में दबी इच्छा ने फिर से इन संस्करणों के डिजिटल प्रारूप को जनमानस को उपलब्ध करवाने की इच्छा ने करवट ली | मैं श्री योगराज प्रभाकर जी से पहले ही प्रभावित था | इन सब से प्रभावित हो कर ही मैंने लाल किताब 1952 को डिजिटल रूप देने का संकल्प लिया व इस काम को अकेले ही शुरू कर दिया | इस वर्जन को 18-01-2016 को सब के लिए उपलब्ध करवाने का जो वादा आप सब से किया गया था आज उसी संकल्प को पूरे होने पर आज 18-01-2016 को सब के लिए परम पूजनीय पंडित रूप चंद जोशी जी के जन्म दिन पर लाल किताब 1952 का डिजिटल संस्करण एक DVD के रूप में सब के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है | इस कार्य को पूर्ण करने के लिए श्री मिल्ख राज बाघला जी, श्री अश्वनी आनंद जी, श्री दलजीत नजूमी जी, श्री जगजीत भोला जी, श्री संदीप वर्मा जी, श्री कुलबीर बैंस जी, डाक्टर हरप्रीत सभ्रवालजी, श्री रबिंदर भंडारी जी ने उत्साह पूर्ण हौसला आफजाई की, मैं उनका दिल से शुक्रगुजार हूँ | इसी के साथ ही लाल किताब के अरमान 1940 का डिजिटल वर्ज़न जो कि सामुद्रिक की लाल किताब के फरमान 1939 के साथ मिक्स करके लिखा गया है, भी उपलब्ध है लाल किताब 1952 का डिजिटल वर्ज़न shopclues.com पर आनलाइन उपलब्ध है इस डिजिटल वर्ज़न की कुछ झलकियाँ पेश हैं
लाल किताब 1952 को पाने के लिए क्लिक करें

http://www.shopclues.com/lal-kitab-1952-astrology-2.html

This DVD is also awailable on shopo.in. Link is given below.

लाल किताब 1952 को पाने का दूसरा लिंक

this dvd how to work click on that link which is given below and view on youtube

View on Youtube

https://www.youtube.com/watch?v=6ocx3tkUx4IIIO

Lal Kitab 1952, how to work in this DVD

YouTube Demo








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बुधवार, जनवरी 06, 2016

Lal Kitab 1952 CD Video





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शनिवार, नवंबर 21, 2015

Get Lal Kitab 1952 Digital Version

लाल किताब 1952 का डिजिटल वर्ज़न 18 जनवरी 2016 को लाल किताब 1952 कुल पेज 1173 का संपूर्ण डिजिटल वर्जन उम्दा गेटअप में सबके लिए एक CD के रूप में शुद्ध रूप में उपलब्ध करवाया जा रहा । इस वर्जन के साथ लाल किताब के फरमान 1940 जो 1939 को साथ में मिक्स करके लिखी जा रही है, वो भी फ्री में उपलब्ध होगी। ये ऑफर सिमित है । ये आफर पहले 500 ग्राहकों के लिए ही उपलब्ध होगी | इसलिए पहले आएं पहले पाएं जिसको चाहिए हो वो अपनी प्रति बुक कर सकता है । ये दोनों वर्जन फ्री में उपलब्ध नहीं होंगे | इसलिए इच्छुक अपने पुरे पते, मोबाइल नंबर व पेमेंट एडवांस में करके बुक कर सकते हैं

अधिक जानकारी के लिए आप मोबाइल नंबर 8198897655 पर काल कर सकते हैं
1000/-deposited in that account which is given below

A/c No. 50100021493957 HDFC
IFSC code- HDFC0001423

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Regard
Vaneet Nagpal
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मंगलवार, मार्च 17, 2015

lal kitab 1952 Vol-1

पंडित रूप चंद जोशी जी कृत लाल किताब 1952 का (व्याकरण हिस्सा फरमान नंबर 1 से 15) पहला भाग का डिजिटल संस्करण सभी लाल किताब से प्रेम करने वालों के लिए निशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है व सभी से गुज़ारिश है कि जो लाल किताब से प्रेम करते हैं वह इस पहले भाग का वयवसाईं कारण नहीं करेंगे | जिसे भी ये संस्करण चाहिए होगा वो या तो इस लिंक से डाउनलोड कर सकता है या जो भी लाल किताब से प्रेम करने वाला इस संकरण को अपने पासे रखता है यदि कोई इसे मांगता है तो वो भी इसे निशुल्क दूसरे शख्स को उपलब्ध करवाएगा | इस संस्करण को निशुल्क उपलब्ध करवाना ही पंडित रूप चंद जोशी जी प्रति सच्ची श्रद्धान्जली होगी | इसी उम्मीद के साथ कि ये सभी के लिए शुभ हो |

लाल किताब 1952 Vol-1 (व्याकरण हिस्सा, फरमान नंबर 1 से 15) Download Link

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सोमवार, अक्तूबर 06, 2014

lal kitab 1952 page 61

गुरु जहाँ दो मंदिर (१) कच्चा(८)
पाप (राहू-केतु) बैठक खुद साथी हो

मारक घर से गुरु भी डरता
आठ दृष्टि खाली जो

ग्रह मुश्तरका (मिले-जुले) बुरा नहीं करते
बंद मुठ्ठी (3) के खानों में

फल 2-11 अपनों अपने
धर्म(२) मंदिर गुरुद्वारा ( नंबर 11) में

ज्ञान समुंदर घर 9 वें का
या फल उम्र हो पहली का

सफेद झंडा कोहसार पे झूले
उम्र बुढ़ापा घर 2 का

पाप की बैठक घर 2 गुरु के
गृहस्ती शुक्र भी बनता जो

लेख जगत का मस्तक गिनते
मौत जन्म जहाँ मिलता तो

इस घर में मंगल(१) बद के नकली ग्रह 5 और पापी(२) ग्रह 6 खुद टेवे वाले पर मन्दा प्रभाव न देंगे बल्कि इस घर में बैठा राहु भी बृहस्पत के मातहत होगा। सब ग्रह अपना तमाम फल जो उनमें से हर एक का खाना नं० 9 में लिखा हुआ है टेवे (जातक) वाले की उम्र के आखिरी हिस्से में देंगे। जैसे खाना नं० 9 में शनि का फल 60 साल लिखा है जो टेवे वाले की उम्र शुरु की तरफ से गिनकर 60 साल बुढ़ापे की तरफ होगा। लेकिन जब शनि खाना नं० 2 में हो तो शनि का वही असर मौत के दिन की तरफ से पीछे जन्म दिन की तरफ को गिनकर 60 साल होगा। इसी तरह ही सब ग्रह प्रभाव देंगे।

2. इस घर के ग्रह आखिरी उम्र बुढ़ापे में हमेशा नेक फल देंगे, खवाह (चाहे) किसी दूसरे उसूलों की गिनती या चाल वगैरह से कितने ही मंदे क्यों न हो।

(1. मंगल बद (सूर्य, शनि)

2. पापी ग्रह (राहु, केतु, शनि)

3. खाना नं० 1, 7, 4, 10

लाल किताब पन्ना नंबर 61



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lal kitab 1952 page 62

धर्म स्थान या पेशानी का दरवाजा :- दोनों भावों की दरमियानी मर्कज, जो नाक का आखिरी हिस्सा है जहाँ तिलक लगाने की जगह है, खाना नं० 2 की असली जगह है। इस तिलक लगाने की निशान की जगह को छोड़ कर माथे की बाकी जगह पेशानी होती है जिसका जिक्र खाना नं० 11 में है। जब खाना न० 2 हर तरह और हर तरफ (खाना नं० 8 की दृष्टि) वगैरा से खाली हो, तो खाना नं० 2 को तिलक की जगह गिनते हैं। इस खाना नं० 2 में हवाई ख्याल की तमाम ताकत में राहु केतु मुश्तरका की या मसनूई (नकली) शुक्र की जगह को मानते हैं। खाना नं० 8 का प्रभाव जाता है खाना नं० 2 में, और 2 देखता है खाना नंबर 6 को, इसलिए खाना नं० 2 का फैसला 2, 6, 8 को साथ मिलाकर होगा या दूसरे शब्दों में खाना नं० 8 को अगर राहु केतु की शनि के साथ होने की बैठक माने तो उस बैठक में बैठ कर या मौत के दीवान खाने का दरवाजा नं० 2 सिर्फ राहु केतु दोनों की बैठक मुश्तरका होगी जिसमे शनि की मौत का ताल्लुक न होगा, सिर्फ राहू केतु की अपनी नेकी बदी का मैदान मंदिर मस्जिद आदि होगा। इस धर्म स्थान का दरवाजा - दोनों भावों के एन दरमियानी जगह (बीच का स्थान ) होगा, जिसका मालिक दोनों जहानों का स्वामी (बृहस्पत) है। जिसके रास्ते की लम्बाई के दोनों सिरों पर सूरज, शनि ((दिन-रात) गिनते हैं, यानि दुनियां से बाहर नं० 8, दुनिया का अन्दर खाना नं० 11 के साथ बृहस्पत की दूसरी ताकत खाना नं० 5 मुस्त्किबल (भविष्य) खाना नं० 9 माजी (भूतकाल) के बीच जमाना हाल, वर्तमान नं० 1 या बंद मुठ्ठी के खाने 1, 4, 7, 10) होगा। थोड़े लफ्जों में जिस तरह खाना नंबर 4 ने अपनी नेकी न छोड़ी थी उसी तरह ही खाना नं० 2 ने कुल दुनियां से ताल्लुक न छोड़ा | अगर नाभि तमाम जिस्म का दरमियान (बीच) था और बंद मुठ्ठी के खाना में खाना नं० 4, बच्चे के साथ लाये हुए खजाने का भेद था तो चेहरे पर तिलक की जगह या दुनियां में बच्चों के लिए बाकी सब तरफ मिलने मिलाने वाला खजाने का लाल किताब पन्ना नंबर 62



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lal kitab 1952 page 60

कुंडली का पक्का घर खाना नंबर २-(धर्म स्थान, उम्र बुढ़ापा) घर चल कर जो आवे दूजे,
ग्रह किस्मत बन जाता हो

खाली पड़ा घर 10 जब टेवे
सोया हुआ कहलाता होआ

बुनियाद समंदर ग्रह(१) 9 होते
पहाड़ ऊंचा घर 2 का हो

चाल असर ग्रह दूजे बैठे
ज़ेर (नीचे) असर गुरु साया(२) हो

हवा बारिश जो 9 से चलती
टक्कर दूजे(३) का खाती हो

आठ पड़ा घर जब तक खाली(४)
असर भला ही देती होआ

शुरू उम्र में असर दूजे का
घर 6वें पर पड़ता हो

जाती असर हो नेक जो अपना
वक्त बुढ़ापे बढ़ता हो

बुनियाद मंदिर(२) घर(१) चौथा गिनते
आठ छटे(३) से मिलता है

खाली(३) होते गुरु मंदिर(२) टेवे
असर रूहानी उम्दा हो

1. खाना नं० 2 हमेशा 9 ही ग्रहों या खाना नं० 9, जो समुद्र गिना जायेगा, की बुनियाद होगा मगर खुद नं० 2 की मियाद खाना नं० 4 होगा।

2. जैसा भी बृहस्पत टेवे में हो वैसी ही हवा के झोकों से साथ होगी।

3. खाना नं० 8 देखता है खाना नं० 2 को, खाना नं० 2 देखता है नं० 6 को, इसी तरह खाना नं० 2 में खाना नं० 8 का और खाना नं० 6 का बाह्मी ताल्लुक (आपसी संबंध) हो जाता है।

खाना नं० 8 खाली हो तो खाना नं० 2 उम्दा होगा, मगर जब खाना नं० 2 खाली हो तो सब कुछ उम्दा होगा।

बृहस्पत नं० 2 और खाना नं० 8 खाली के वक्त पर बृहस्पत मंदा ही होगा या बृहस्पत की हवा मंदी आंधी होगी जो हर तरह का नुक्सान करेगी। मगर नं० 9 बरसाती मौनसून हवा के उठने का समुद्र हो तो खाना नं० 2 बारिश से लदी हवा से टकरा कर बरसाने वाला कोहसार (पहाड़ों का लम्बा सिलसिला) होगा।
लाल किताब पन्ना नंबर 60



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