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सोमवार, फ़रवरी 06, 2012

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आदत नहीं है .....

आदत नहीं है

आ के तेरे दर पे
मुझे मुस्कराने की आदत नहीं है |

तेरे इस हाल पे
मुझे मुस्कराने की आदत नहीं हैं |

मिलने की इच्छा की
खुद चला आया, कहलाने की आदत नहीं है |

प्यार है तुमसे
है इकरार, नज़र चुराने की आदत नहीं है |

जख्म लगता है रोज
मगर जख्म छुपाने की आदत नहीं है |

भटकते हैं कदम अक्सर
मगर मय में डूब जाने की आदत नहीं है |

दर्द मिला मुझे
तेरे जुदाई में, मगर सुनाने की आदत नहीं है |

क्या आपको ये अंदाज़ पसंद आया ? यदि हां !!! तो अपने विचारों से अवगत कराएं |


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7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी रचना.
    वैसे मुझे भी कमेन्ट करने के आदत नहीं................
    मजाक था.................
    बहुत ही अच्छी कविता.

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह बहुत खूब ॥समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

    जवाब देंहटाएं

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