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गुरुवार, नवंबर 24, 2011

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नेताओं के कहने का अंदाज़ निराला है |

अंदाज़

नेताओं  के कहने  का अंदाज़ निराला है |
कहता गरीबों  को  वह सुधारने वाला है ||

क्या आस लगाये एक गरीब ? उस नेता से |
जब  दुनिया  में न कोई उसका रखवाला है ||

गरीबों का खून चूस कर बनाता है कोठियां अपनी |
मज़बूर  जिंदगी  रोज  पीती गम  का  प्याला  है ||

तरसते  हैं  वो, रोज  एक-एक  रोटी  को  जो |
इन  सबका  जिम्मेदार   ये   खद्दरवाला  है ||

मंदिर मस्ज़िद  में भेद जताता हर  किसी से |
ऐसा  खुद   को  कहलाता   इज्जतवाला  है |

कहता है मिटा देंगे हर एक घर से गरीबी |
ऐसे नारों से गरीबों को ही मिटाने वाला है |


इसी को कहते हैं :-अंदाज़

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5 टिप्‍पणियां:

Vaneet Nagpal
  1. अगर नेताओं में ये गुण नहीं है तो नेता कैसा....
    सुंदर पोस्ट,मेरे पोस्ट पर आइये...

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  2. बस अंदाज़ ही निराला है।
    बाक़ी सबकुछ काला है।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. अंदाज की बखिया उधेड़ने का अंदाज भी निराला ही रहा...

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. Hame maloom hai Jannat hai gaaleeb dil bahlane ka khyal nirala hai

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

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