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रविवार, सितंबर 04, 2011

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asli lal kitab hindi mein : farman no.-6 page-27

असली "लाल किताब के फरमान 1952" हिंदी में फरमान न: 6 पेज़-27

फरमान न: 6      राहु और केतु को हथेली पर कोई पक्की जगह अलहदा तौर पर नहीं दी गई लहरों के मालिक हैं एक ने इन्सान को सर से पकड़ा और दोसरे ने पाँव से तो खुद बखुद उनको जगह मिल गई और वह बुध (के साथ केतु जो नेकी का मालिक है खाना न% 6 पाताल में)और बृहस्पत के साथ राहु जो बदी का हाकिम है खाना न% 12 आसमान में के साथ तमाम आकाश ब्रह्माण्ड जो बृहस्पत बुध दोनों मिले जुले का परिणाम हो में बैठे हों और दुनिया और इस इल्म में पाप के नाम से मशहूर हुए ग्रहों का काल समय

अगर एक दिन औसतन 12 घंटे पहले का अरसा हो तो

केतु दिन चढने से दो घंटे पहले का

बृहस्पति दिन निकलने के बाद आठ बजे तक का अरसा

सूरज आठ बजे से दस बजे तक का अरसा

चन्द्र दस बजे से ग्यारह बजे तक का अरसा

शुक्र दस बजे से तीन बजे तक का अरसा

मंगल दिन के ग्यारह बजे से एक बजे तक, बुध चार बजे से एक बजे तक

शनिच्चर दिन छुपने के बाद जब तक एक भी सितारा निकल पड़े

राहु दिन छुप गया मगर सितारे अभी तक नहीं निकले

लाल किताब पन्ना नंबर 30

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