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रविवार, सितंबर 04, 2011

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asli lal kitab hindi mein : farman no.-6 page-22

असली "लाल किताब के फरमान 1952" हिंदी में फरमान न: 6 पेज़-22

ग्रहों की अवधियाँ
1. हर ग्रह अपनी अवधि के आधे या चौथाई भाग अवधि में भी अपनी प्रभाव प्रकट कर दिया करता है |
2. राहु की 42 तो केतु की 48 मगर दोनों की मिलीजुली अवधि 45 होगी |
3. ग्रहण के समय (सूरज राहु मिले-जुले) = सूरज ग्रहण
चन्द्र केतु राहु परस्पर = चन्द्र ग्रहण
4. शनि के 10, 19, 27वें साल प्राय: नेक असर देगा और मैदानी हलाका में मृग को हिरण, पहाड़ी इलाका में बीतल को मृग बोलते हैं|

मगर ग्रह चाली अवस्था में हिरण खा मामूली खा बारह सिंहा को मंगल बद कुत्ते और चीता (दरिंदा इंसान को फाड़ देने वाला)
और
18 पिता 27 (माल मकान पशु) पर मंदा असर देगा 36 साल से 39 साल उम्र में साधारण असर देगा 5. जैसे की टेवे के अनुसार उस वक्त हो, किस्मत उदय के लिए बुध 23 मंगल 30 साला उम्र में हर ग्रह अपनी-अपनी अवधि पर असर देंगे

एक साल की अवधि को तीन पर विभक्त करके हर टुकड़ा चार मास का होगा | जिसमें दरम्यानी राह का असर मिल रहा होगा उदाहरणतया बृहस्पत वर्षफल के अनुसार अगर खाना न: 5 में आया हो तो उस साल के पहले चार महीनों में खाना न: 5 पर केतु का असर होगा जैसा की यह (केतु) उस वक्त भी जब वर्षफल हो दूसरे चार माह में खुद बृहस्पति का अपना असर जैसा की वह वर्ष हो और आखिरी चार माह में सूरज का असर जैसा की (सूरज) वर्षफल के अनुसार मिलता होगा इसी तरह ही हर एक ग्रह में उसके सामने दिए हुए दरम्यानी ग्रहों का असर मिला होगा |


ग्रहों की अवधियाँ
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