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शुक्रवार, दिसंबर 16, 2011

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गज़ल के बारे में गहराई से जानने के लिए ये जानना बहुत ही जरूरी है कि मतला, मक़ता, काफ़िया और रदीफ़, रुकण, ईता दोष आदि क्या होते हैं ?

प्रश्न : मतला क्या होता है ?

उत्तर : ग़ज़ल के प्रारंभिक शे'र को मतला कहते हैं | मतला के दोनों मिसरों में तुक एक जैसी आती है | मतला का अर्थ है उदय | उर्दू ग़ज़ल के नियमानुसार ग़ज़ल में मतला और मक़ता का होना अनिवार्य है वरना ग़ज़ल अधूरी मानी जाती है । लेकिन आज-कल नवागुन्तक ग़ज़लकार मकता के परम्परागत नियम को नहीं मानते है या ऐसा भी हो सकता है कि वो इस नियम की गहराई में जाना नहीं चाहते व इसके बिना ही ग़ज़ल कहते हैं । कुछेक कवि मतला के बगैर भी ग़ज़ल लिखते हैं लेकिन बात नहीं बनती है; क्योंकि गज़ल में मकता हो या न हो, मतला का होना लाज़मी है जैसे गीत में मुखड़ा । आप सभी मेरी इस बात से सहमत होंगे कि यदि किसी गीत में मुखड़ा न हो तो आप खुद ही अनुमान लगा सकते हैं गीत कैसा लगेगा । गायक को भी तो सुर बाँधने के लिए गीत के मुखड़े की भाँति मतला की आवश्यकता पड़ती ही है। ग़ज़ल में दो मतले हों तो दूसरे मतले को 'हुस्नेमतला' कहा जाता है। मत्‍ले के शेर में दोनों पंक्तियों में काफिया ओर रदीफ़ आते हैं । यहाँ पर एक और बात जिकरयोग है कि मत्‍ले के शेर से ही ये निर्धारण किया जाता है या ये निर्धारित होता है कि किस मात्रिक-क्रम (बहर) का पूरी ग़ज़ल में पालन किया जायेगा या ग़ज़ल कही जायेगी |

'हुस्नेमतला' : किसी ग़ज़ल में आरंभिक मत्‍ला आने के बाद यदि और कोई मत्‍ला आये तो उसे हुस्‍न-ए-मत्‍ला कहते हैं ।

मत्ला-ए-सानी :एक से अधिक मत्‍ला आने पर बाद वाला मत्‍ला यदि पिछले मत्‍ले की बात को पुष्‍ट अथवा और स्‍पष्‍ट करता हो तो वह मत्‍ला-ए-सानी कहलाता है।

प्रश्न : मकता क्या होता है ?

उत्तर : ग़ज़ल के अंतिम शे'र को मकता कहते हैं । मकता का अर्थ है अस्त। उर्दू ग़ज़ल के नियमानुसार ग़ज़ल में मतला और मक़ता का होना अनिवार्य है वरना ग़ज़ल अधूरी मानी जाती है। मकता में कवि का नाम या उपनाम रहता है । नाम या उपनाम से भाव उस शब्द से जिस नाम से उस शायर को जाना जाता है |

जैसे :-पंजाबी के नामवर शायर श्री दियाल सिंह 'प्यासा', यहाँ पर प्यासा मकता कहलायेगा |
एक और उदाहरण : आर.पी.शर्मा 'महर्षि', यहाँ पर 'महर्षि' मकता कहलायेगा |
इसे एक और उदाहरण से समझने का प्रयास करेंगे :- जैसे कि आप सभी जानते हैं कि मेरा नाम विनीत नागपाल है | बहुत से जानने वाले मुझे सिर्फ नागपाल जी के नाम से संबोधन देते हैं | मैंने अपने नाम का इस्तेमाल सिर्फ आपको समझाने के लिए किया है | असल में गज़ल लिखने या कहने वाले ज्यादातर शायर अपने नाम के साथ उपनाम का प्रयोग जरूर-जरूर करते हैं | उदाहरण के तौर पर गौर फरमाएं कि मिर्ज़ा 'ग़ालिब', आज के स्तंभ डॉ. रूप चंद शास्त्री 'मयंक', यहाँ पर 'ग़ालिब' 'मयंक' इन नामवर शायर के उपनाम हैं |

प्रश्न : शे,र किसे कहते हैं ?

उत्तर :दो पंक्तिओं या दो लाइनों या दो मिसरों या पंजाबी में (ਦੋ ਸਤਰਾਂ) के जोड़ को या इसे कुछ इस तरह भी समझ सकते हैं कि किन्ही दो पंक्तिओं को शे,र कहा जाता है | शेर की प्रत्‍येक पंक्ति को ‘मिसरा’ कहा जाता है। शेर की पहली पंक्ति को मिसरा-ए-उला कहते हैं और दूसरी पंक्ति को मिसरा-ए-सानी कहते हैं| शेर के दोनों मिसरे निर्धारित मात्रिक-क्रम की दृष्टि से एक से होते हैं । इन्हीं मिसरों को मात्रिक-क्रम के आधार पर ही किसी न किसी बहर से निर्धारित किया जाता है |

प्रश्न : तक्‍तीअ क्या है या तक्‍तीअ किस कहते हैं या तक्‍तीअ क्या होती है ? उत्तर : ग़ज़ल के शेर को जॉंचने के लिये तक्‍तीअ की जाती है जिसमें शेर की प्रत्‍येक पंक्ति के अक्षरों को बहर के मात्रिक-क्रम के साथ रखकर देखा जाता है कि पंक्ति मात्रिक-क्रमानुसार शुद्ध है। इसी (तकतीअ पद्धति) से यह भी तय होता है कि कहीं दीर्घ को गिराकर हृस्‍व के रूप में या हृस्‍व को उठाकर दीर्घ के रूप में पढ़ने की आवश्‍यकता है अथवा नहीं। विवादास्‍पद स्थितियों से बचने के लिये अच्‍छा यही रहता है कि किसी भी ग़ज़ल को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने के पहले तक्‍तीअ अवश्‍य कर ली जाये ताकि जब कोई गज़ल के फनकार आप द्वारा कही गज़ल की परख करें तो उन के मापदंड पर खरी उतरे |

इस पेज के निरंतर अपडेट होने की संभावना बनी रहेगी |

क्या आपको गज़ल पर विस्तार से जानकारी पसंद आ रही है ? यदि हां !!! तो अपने विचारों से अवगत कराएं | यदि कोई कमी महसूस होती है तो अपने सुझावों से भी अवगत कराएं | यदि आपकी नज़र में कोई जानकारी इस पेज पर होनी चाहिए अगर आपके पास वो जानकारी है तो आप उस जानकारी को मुझे ई-मेल करने की ज़हमत करें | इस लेख का मकसद जो गज़ल कहने की गहराई को नहीं जानते उनके लिए इस जानकारी को प्रस्तुत करना भर है | कोई वाहवाही लूटने का नहीं |


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9 टिप्‍पणियां:

Vaneet Nagpal
  1. Aage bhi jankari dete rahiye ...kyonki mai geet gazal to likhti hoon , par formal koi teaching mere pas nahi hai ...haan gaate gaate likh diya karti hoon ...agar jyada jaankari mile to kuchh aur sanvar ytthegi rachnayen ...

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  2. इस तरह जानकारी मिले तो काफ़ी कुछ सिखा जा सकता है।

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  4. बहुत सरल तरीके से आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है |

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